प्यारे दोस्तों ,
नमस्ते
मनोहर श्याम जोशी एक प्रशिद्ध कहानीकार है मै आज उनके कहानी संग्रह "मनोहर श्याम जोशी की संपुर्ण कहानियाँ "में से गुड़िया कहानी की आपके सामने समीक्षा साझा करने जा रहा हूँ ।
बालमनोविजान पर आधारित गुड़िया कहानी मनोहर श्याम जोशी की उत्कृष्ठ रचना है । इस कहानी में मानवीय संवेदनाओं और बच्चों की मनोस्थितियों को बहुत सुदंर अच्छे तरीके से उकेरा गया हैं जैसा की कहानी के नाम से ही स्पष्ट हैं कि यह कहानी एक गुड़िया पर आधारित हैं ।
कहानी में हम देखते हैं कि मधुली छ: साल की एक भोली लड़की हैं जिसके पिता क्षयग्रस्त की गंभीर बीमारी के शिकार होने के कारण मृत्यु को प्राप्त हो चुके होते हैं माँ गाँव के घरो बरतन मांज कर बच्चों का पेट पालती है उसकी बेटी मधुली भोली व दूसरो पर विशवास करने वाली लड़की है जब कभी उसको राजेन्द्र लाल सैप जिनके घर में मधुली की माँ काम कराती है कहते है की वो उसके लिए बाजार से एक गुड़िया लेकर आएगे जो की दुध पिएगी व रोएगी तो मधुली उसको पूर्णत्य सच मान लेती है और राजेन्द्र लाल सैप जोकि बाजार में पढने के लिए गए है का लंबे समय तक इंतजार करती है और उनकी बात को भूलती भी नही है गुड़िया को प्राप्त करने की ईच्छा और उत्साह बहुत अधिक प्रबल दिखाई देता है । मनुष्य की यह प्रवृति है की कोई नई वस्तु को प्राप्त करने की भावी अशम्काओ के वेग में उपलब्ध वस्तुए उसको तुच्छ लगती है मधुली के साथ भी यही हुआ उसको अपनी पुरानी गुडिया अच्छी नहीं लगाती वो कहती है की उसको पुरानी गुडिया दूध नही पीती वह रोती भी नही है उससे पुरानी गुडिया का मोह भंग हो जाता है । वह गुड़िया के लिए किसी से मांग कर दूध व कपड़े का इतजाम कर लेती है वह आज बहुत खुश है क्योकि आज लाल सैप आने वाले है वो सोचती है की गुड़िया भूखी होगी वह उसके लिए दूध भी ले आती है । उसका विश्वास इतना प्रबल है कि वो अपनी माँ , हरिया का भी विश्वास नही करती उसके लिए लाल सैप का इंतजार में एक घंटा भी व्यतीत करना भी बहुत मुश्किल हो जाता हैं । वह अपने साथी हरिया के पास जाती है उससे खेलती है पर गुडिया को प्राप्त करने की इच्छा ज्यो की त्यों बनी रहती है लेखक ने निम्न वर्गीय परिवार के बच्चो में फैलती विसंगतियो का चित्रण भी किया है मधुलि के माध्यम से उसने कहा है की वह बुड्डो वाल खेल नहीं खेलेगी जिससे मुँह में से धुँआ निकलने पर खम्शी आती है ।
मधुलि इस कहानी का केंदीय पात्र है उसकी क्रियाए ,बाते व् अन्य कार्य उसके चरित्र को पुर्ण रूप से उजागर करते है ।
लेकिन कहानी के अंत में उसकी सारी आशाए मिटटी में मिल जाती है उसके आशाओं के पहाड़ टूट जाते है जब लाल सैप उसको पहचानते भी नहीं न ही उसके लिए गुड़िया भी लेकर नही आते औरगुड़िया के बारे में पूछने पर डंडे से उसके कुलहो पर मार देते है और हँस कर चले जाते है भयंकर दर्द से मन के भाव आसुओ के रूप में आँखों में से निकल पड़ते है । सारी आशाए चुर -चुर हो जाती है उसके उपर मार का दर्द माधुली रोती है कही न कही एक उच्च वर्ग का निम्न वर्ग पर शोषण का संकेत देता है और उसको पुरानी गुडिया से ही संतोष करना पड़ता है ।
मधुलि का भोला पन ही उसके चरित्र की विशेषता है कहानीकार ने वो सारी विशेषताए माधुली के चरित्र में भर दी है जो की एक मुख्य पात्र में होनी चाहिए और मधुलि के माध्यम से कहानीकार ने शोषित निम्न वर्गीय परिवार के बच्चो की त्रासदी को मधुलि व हरिया के माध्य से उकेरा है जिसमे वो कामयाब भी रहा है ।
अंत में हम यह कर सकते है की कहानीकार ने अपनी कलम के माध्यम से आर्थिक विषमता व जीवन की आधारभूत यथार्थ व निम्न श्रेणी के बच्चो की मुश्किलों व् समाजिक स्थितियों को मधुलि के माध्यम से सहज और सरल भाषा में पाठको के दिलो दिमाग पर अंकित करने की अद्वितीय कोशिश की है
धन्यवाद
संदीप कुमार घोडेला
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